चिंता या चिंतन / Anxiety or contemplation

ॐ 

 चिंता  या  चिंतन


चिंता शब्द भयानक है।  दुनिया में शायद कोई ऐसा सांसारिक आदमी नहीं है जिसने इसका सामना न किया हो।  मैं सांसारिक आदमी इसलिए कह रहा हु की जिसे अंदरसे वैराग्य जगा है उसे तो दूर दूर तक चिंतासे नाता नहीं है।  संसारी में साधु भी आता है जो अभी भी आश्रमों में है और पैसे के लिए भागता है।  वे चिंता शब्द के भी शिकार हैं।  आज की तेजी से भागती दुनिया में, हर कोई किसीना किसी चिंता से चिंतित है।  मैंने यह शब्द छोटे बच्चों के मुंह से भी सुना है।  कितना अजीब है !!!  हर किसी को अभी से कुछ चिंता है।  बच्चे, पत्नी, घर, नौकरी, व्यवसाय, अधिक पैसा कमाना, अगर शरीर में कोई बीमारी है, आदि आदि।  सुबहसे रात तक लोग किसीने किसी चिंतामे फसे हुए है। मैंने ऐसे लोगों को भी देखा, जो पूरी रात अपनी नींद में भी काम करते रहेते हैं।  समझ नहीं आता कि इस छोटी सी जिंदगी में आदमी को क्या हासिल करना है ??

 बहुत बुद्धिमान लोगों के साथ ऐसा नहीं है जो दुनिया के लिए नए आविष्कार कर रहे हैं।  हो सकता है कि वे चिंता शब्द का अर्थ भी नहीं जानते हैं क्योंकि वे हर तरफ से सब परिस्थितिओं को देखते हैं, अर्थात, बुद्धिजीवियों को हर चीज का विश्लेषण करने की आदत होती है, इसलिए चिंता शब्द के साथ उनका बहुत संबंध नहीं होता है।  आम बोलचाल में, चिंतन की आदत।

 हम सामान्य मनुष्य, जो हर दिन उठते हैं, हर दिन काम करते हैं, खाते हैं, पीते हैं, व्यापार करते हैं और अपने सिर पर चिंताओं की गठरी लेकर घूमते हैं।  कोई लोग ऐसेभी है जिसे कोई फर्क नहीं पड़ता कुछ भी हो जाये।  अगर घर में पति-पत्नी हैं, तो सारी चिंताएँ, बच्चों की पढ़ाई की चिंता, उनके भविष्य की चिंता, उनके बसने की चिंता, शादी करने की चिंता, शादी के बाद बच्चों की चिंता।  उसका क्या होगा?  कैसे होगा?  कहां से आएगा?  आदि आदि।  वास्तव में, हमारे आधे से अधिक जीवन झूठी चिंताओं में बिताए जाते हैं।

हम अक्सर इन चिंताओं को विरासत में लेते हैं।  आपने कई बार देखा या सुना होगा कि घर के बुजुर्ग हर बात को लेकर इतने चिंतित रहते हैं कि बढ़ते हुए घर के बच्चे भी इस प्रक्रिया को एक सामान्य प्रक्रिया के रूप में लेते है और बड़ो की तरह चिंता करते रहते हैं।   इन दिनों में चिंता करना आम बात है।

     लेकिन यही चिंता हमारे शरीर में कई बीमारियों को आज भी बिना पूछे बुलाती है।  आज की अधिकांश बीमारियाँ मानसिक चिंताओं के कारण अधिक पाई जाती हैं।  वैज्ञानिकों ने इस पर काफी शोध भी किया है।  जितनी शारीरिक बीमारियां है उससे ज्यादा मानसिक बीमारियां हैं।  ये सभी मनोविज्ञान डॉक्टर अभी बहुत कमा रहे हैं।  मनुष्य इस जीवन में भौतिक चीजों को पाने की दौड़ में इतना तेज होता जा रहा है कि इसके साथ ही मानसिक तनाव, चिंताएं भी बढ़ रही हैं।  आज मनुष्य के पास सब कुछ है लेकिन सभी के पास समय का अभाव है।  परिवार के लिए अच्छा किया लेकिन अपने लिए नहीं।  अभी जितने ध्यान केंद्र हैं उतने पहले नहीं थे।  उन ध्यानकेंद्रमे जाने वालोकी संख्या भी बहुत बड़ी है।  लोगों के पास आज सभी तरह की सुविधाएं हैं।  जीवन में घंटों लगने वाले काम  आज मिनटों में होने लगे हैं।  लोगों के पास आधुनिक वाहनों है, घर सेही अपने  पुरे व्यवसायको संभाल सकते है , गृहिणियों का जीवन भी बहुत आसान हो गया है।  चटनी बनाने जैसे आधे घण्टेका काम सिर्फ पांच मिनटमे हो जाता हैं, वॉशिंग मशीन, डिशवॉशर, झाड़ू पोछेकाभी मशीन......... सभी सुविधाओं के बावजूद, हमारे पास समय की कमी है।

अभी मैं हर किसी को छोटी-छोटी बातों पर चिंता करते देखता हूं।  हम बिना सोचे समझे बहुत सारी चिंताएँ कर रहे हैं।  आज कोई भी ऐसा नहीं है जिसे कोई समस्या नहीं है लेकिन अगर हम उन समस्याओं के बारे में चिंता करने के बजाय उनके बारे में सोचते हैं, तो समस्या निश्चित रूप से हल हो जाएगी।  यदि हम अपना 100 प्रतिशत कार्य उस कार्य में लगाते हैं जो हम कर रहे हैं, तो वह कार्य सफल होने के लिए बाध्य है।  लेकिन हम यहां काम कर रहे हैं और दिमाग कहीं और चल रहा है।  हम जहां हैं वहां कभी नहीं होते।  इसलिए मेरा मानना ​​है कि आप जो करते हैं उस पर ध्यान देना हैं।  यह चिंता से बचने का एक प्रभावी तरीका है।  जब हम अपने काम का 99.99 प्रतिशत देते हैं, तो हमें काम की सफलता के बारे में चिंता करने की ज़रूरत नहीं है।  सही बात है ना !!!

 अगर कभी कोई समस्या है, तो यह सोचा जा सकता है कि मैं समस्या के बारे में कुछ कर सकता हूं, यदि हां, तो चिंता करने की कोई जरूरत नहीं है।  और अगर वहाँ कुछ भी मैं नहीं कर सकता और अपने बसमे कुछभी नहीं है तो भी चिंता करनेसे फायदा नहीं है।    इसलिए चिंता के बारे में सोचना फायदेमंद है उसपे चिंतन करना लाभकारी है।


दोस्तों, किसी भी चीज की चिंता करने से पहले, हमेशा याद रखें कि एक आदमी केवल एक बार चीता की आग में जलता है, लेकिन अगर वह चिंता की आग में जलने की आदत में पड़ जाता है, तो वह हर दिन जलता है।  इसलिए चिंता के बारे में चिंतन करके हल ढूढ़ना आवश्यक है।

 आपको क्या लगता है दोस्तों ???  मुझे ज़रूर बताएगा. फिर मिलते है तब तक शामडिवाइन्न का प्रणाम स्वीकार करें. 🙏🙏🙏

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