खुश आदमी संतुष्ट है या संतुष्ट आदमी खुश है / Happy man contented or contented man happy
ॐ
कल एक चर्चा हुई कि "खुश आदमी संतुष्ट है या संतुष्ट आदमी खुश है"
आप सोच रहे होंगे कि ऐसी चर्चा किसके साथ की होगी। आपने उस हिंदी गीत को सुना होगा, " आईने के सो टुकड़े करके हमने देखे है एक में भी तन्हा थे और सो मे भी एकेले है ", इसलिए मैंने भी अकेले ही अपने साथ चर्चा की ।
लेकिन मुझे यह सवाल बहुत पसंद आया। गरीब आदमी को लगता होगा की अमीर होना कितना सुखद है! किसी बात की फ़िक्र नहीं जब चाहो जैसे चाहो जियो। यदि वह एक मध्यम वर्ग का आदमी है, तो ऐसा सोचता होगा कि वो गरीब आदमी खुश है रोज कमाओ रोज खाओ , वह चिंता नहीं करेगा, वह हर दिन कमाएगा और खाएगा। लेकिन मध्यम वर्ग के पास न तो अधिक पैसा है और नहीं वो गरीब की तरह जी सकता है । हमने हर तरफ से मध्यम वर्ग को मारा। जिनके पास पैसा है उन्हें चिंता है कि अधिक पैसा कहांसे बनाया जाए। लेकिन अपने भीतर सभी अपने तरीके से चलते हैं।
आदमी को कितना चाहिए? एक घर, एक छोटा दोपहिया वाहन या कार, पहनने के लिए कुछ कपड़े, खाने के लिए भोजन, थोड़ा आराम और थोड़ा अतिरिक्त पैसा अगर किसी आपात स्थिति में जरूरत हो। ऐसी बुनियादी जरूरत। यदि हां, तो जीवन बेहतर हो सकता है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि में प्रगति करने के लिए अनिच्छुक हूं। अगर बहुत कुछ है और मेहनत करेंगे तो और भी ज्यादा आएगा । फिर एक बड़ा घर, एक बड़ी गाड़ी, हर दिन नए कपड़े, हर हफ्ते होटलों में खाना वगैरह वगैरह ……… .अब ये कहाँ खत्म होता है ???? पता नहीं।
जीवन समाप्त हो जाता है लेकिन मानवीय इच्छाएं समाप्त नहीं होती हैं। और ये इच्छाएँ इतनी भयानक होती हैं कि मनुष्य अपने शरीर को पंचभूतों में विलीन कर लेता है लेकिन ये इच्छाएँ केवल आत्मा के साथ चारों ओर घूमती हैं और आत्मा इन इच्छाओ के कारण इस पृथ्वी पर कई चक्कर लगाता है।
लेकिन मेरी चर्चा "संतुष्टि" के साथ थी। यह संतोष क्या है? हमने कई बार सुना होगा कि संतुष्ट पुरुष हमेशा खुश रहते हैं। लेकिन हमेशा के लिए खुश रहना और संतुष्टि कहाँ से मिलेगी ???
वास्तव में, जीवन में कई गुणों की आवश्यकता होती है। आत्मविश्वासी, साहसी, बहादुर, इन सभी गुणों के साथ धैर्य, परिश्रम और संतुष्टि। इसके बिना हम अपने जीवनमें घोलूके बेल की तरह काम करते रहेंगे। कभी-कभी हमारे पास एक छोटा घर होता है, तो बड़ा घर बनाना है, अगर हमारे पास एक छोटी कार है, तो हमें एक बड़ी कार लेनी होगी, अगर हम अबू जाते हैं, तो हमें यूरोप का दौरा करने लिए ....और बहुत सारे। जब आप कड़ी मेहनत, नीति, ईमानदारी, धैर्य के साथ जीवन में आगे बढ़ते हैं, तो संतुष्टि की गुणवत्ता आपको आगे बढ़ने और सोचने का मौका देती है। संतोष का गुण हमें आगे बढ़ने से नहीं रोकता है लेकिन यह निश्चित रूप से बताता है कि हमारे जीवन में क्या चल रहा हैं। कभी-कभी हम सोचते हैं कि हम बिना किसी कारण के खुश हो रहे होते हैं। अगर आप सोचेंगे तो उस दिन हमारे साथ कुछ अच्छा हुआ होगा या जाने अनजाने हमने कुछ अच्छा काम कर दिया होगा। आप जिस भी जॉब का आनंद लेते हैं और शाम को ऐसा होता है कि वाह क्या दिन गया आज खुद को देखिए उस दिन आप इतने खुश नहीं होंगे कि आपकी सैलरी बढ़ गई हो, आपको एक और अच्छी जॉब मिल गई है कि, बच्चे अच्छे परिणाम लाएं…। लेकिन यह सब बहुत खुश है कि हमने या बच्चों ने जो किया वह उतना संतोषजनक था जितना हमने सोचा था कि यह होगा। और फिर शांति का अहसास हुआ।
यह तब होता है जब हम हमारे पास जो है उससे खुश होते हैं और क हम खुश हैं या नहीं ये कैसे जाने? तो इसके लिए दोस्तों, जब आप अपने दोस्तों की बड़ी कारों या घरों को देखकर प्रगति करना चाहते हैं, लेकिन आप इसे पचाना ( छीनना, जलते नहीं )नहीं चाहते हैं, तो आप समझने के लिए सही रास्ते पर हैं। यह गुणवत्ता स्थायी नहीं है, इसे बनाए रखना है, इसलिए समय-समय पर अपनी अंदर की आवाज सुनें। सही जवाब वहीं से आएगा। इसलिए हो सकता है कि किसी ने कहा हो कि किसी और के महल को देखकर, उसकी अपनी झोपड़ी को ना जलाए। आगे बढ़ने के लिए ममुशकेली को मत देखो सिर्फ महेनत करो किसीकी इर्षा नहीं। दूसरेकी लाइन को छोटी करने के लिए उनकी लाइन मत पोछो बल्कि अपनी लाइन इतनी लम्बी बनाओकी उनकी लाइन अपने आप छोटी हो जाए.
आपका क्या कहना है जरूर बताएगा. फिर मिलते है तब तक शामडिवाइन्न का प्रणाम स्वकार करें 🙏🙏🙏



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