जीवनका प्रश्न पत्र / Life's question paper

 

जीवनका प्रश्न पत्र

मुझे लिखना पसंद है।  हालाँकि मैं वाणिज्य का छात्र थी , फिर भी मैं हमेशा साहित्य पर मोहित रही ।  मुझे चित्रकाम करना भी पसंद है, मैं अब भी कभी-कभी एक चित्र बनना पसंद करती हूं।  मुझे पहले भी लिखना पसंद था लेकिन फिर सब कुछ अपने तक ही सीमित था।  जीवन में कब क्या मोड़ आ जाए कोई नहीं जानता।  और अगर हम जानते  तो तैयारी करें लेकिन जीवन का प्रश्न पत्र कभी भी समय से पहले खुलता नहीं  है।  वहां हर दिन पढ़ाई और हर दिन परीक्षा देना है।  हालांकि, परीक्षा का नाम सुनते ही बड़े  भी गभरा जाते है।  स्कूल की परीक्षा देते समय आपने कितनी तैयारी की थी?  मेरे जैसा एक सुबह का पक्षी जो जल्दी उठता है और पढ़ता है, कई लोग रात का  राजा जो आधी रात तक पढ़ता है और किसी विषय पर एक किताब होती है और परीक्षा मे पूछे जानेवाले प्रश्न भी उसीमेसे होते है फ़िरभी हम रट्टा मरते रहते है ।  जैसे ही परिक्षे पूरी होती है, हम आज़ाद हो जाते है. जब परिणाम आएगा तब तब की।  

 लेकिन जीवन की कसौटी में ऐसा नहीं होता।  इसकी कोई किताब नहीं है, कोई पुनरावृत्ति नहीं है।  प्रत्येक व्यक्ति जीवन की स्कूल का एक छात्र है और जन्म से मृत्यु तक है।

 हम हर दिन कुछ न कुछ सीखते हैं।  और सीखने की लौ हमें जीवित रखती है।  दुनिया में जानने के लिए बहुत कुछ है, लेकिन हमारे जीवन में हम सब कुछ नहीं सीख या जान सकते हैं।

 मनुष्य एक प्रगतिशील और विकसित जानवर है।  वह हमेशा नई चीजें सीखना पसंद करते हैं।  अगर ऐसा नहीं होता तो इस दुनिया में इतने आविष्कार नहीं होते।  आप कहेंगे कि हर कोई वैज्ञानिक नहीं हो सकता।  यह सच है कि प्रत्येक दीपक एक सूरज नहीं हो सकता है, लेकिन वह एक कमरे को तो प्रकाशीत कर सकता है।  हर किसी को सब कुछ हासिल करना नसीब नहीं होता है, लेकिन जो हम चाहते हैं उसे हासिल करने के लिए हमारे पास हिम्मत और ताकत होनी चाहिए।  यह साहस या ताकत दुकानों या मॉल में कहीं भी नहीं पाई जाती है।  इसे भीतर से जगाना होगा।  यदि आप एक बार कुछ भी करने की हिम्मत करते हैं, तो किसी को भी आपको रोकने की ताकत नहीं है।  साथ ही दूसरों की भलाई करने की भावना होनी चाहिए।  जब हम सही नीति, साहस और दूसरों के कल्याण की भावना के साथ कुछ भी करते हैं, तो यह भगवान की पूजा करने जैसा है।  इसलिए जहाँ भी आप कुछ सीख सकते हैं उसे सीखते रहें क्योंकि सीखने की भावना, नई चीजों को जानने की जिज्ञासा व्यक्ति को कभी भी मानसिक रूप से बूढ़ा नहीं होने देती। इसलिए हमेशा नया कुछ सीखते रहिए. आपका क्या कहना है दोस्तों जरूर बताएगा.


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